Friday, December 31, 2010

वर्ष का अंतिम दिन .........

रोज  ध्यान रखता हूँ
सहेज कर रखता हूँ कितना

फिर भी हर बार
छीन ले जाते हो तुम
किस तेजी से...

मेरे

चेहरे से रंगत
दोस्तों की संगत

आँखों  की लालिमा
बालों की कालिमा

दिन  की स्निग्धता
रातों की उनिग्धता

गर्दन का गुरूर
बातों का सुरूर

क़दमों की तीव्रता
धड़कन की आवृता

रिश्तों की पहचान
किराये का मकान

छुटपन के साथी
संस्कारों कि थाती

हर बार
ले ही तो लेते हो तुम
बिना समय गवाए
बिना  सूचित किये
न चेतावनी
न कोई राहत

बस आभास भर
और
गुजर जाते हो
दबे कदमों से

किस कदर
निष्ठुर
आताताई हो तुम

ओ नव वर्ष
फिर कैसे 
स्वागत  करू
भला तुम्हारा