Thursday, July 6, 2017

यादें तुम्हीं ने कहा था

""यादें""....तुम्हीं ने कहा था न ...
यूं ही तो कहीं
मिल जाती हैं
भूली बिसरी सी यादें,
किसी तन्हां दराज
या किसी
पुराने ब्रीफकेस
की जेबों में,
कोई नॉवल
या कालेज की
किताबों में,
...कुछ पत्तियां
सूखे गुलाब की,
....कुछ पीत
अतीत के पन्ने,
..धुंधलाये से कुछ
ग्रीटिंग कार्डस,
...अधलिखा सा
गुलाबी लेटरहेड,
पहले पहले गिफ्ट का
"लव यूं" वाला रैपर,
..उखड़ी उखड़ी सी
ब्लैकनवाईट तस्वीरें,
..कालेज कैंटीन
की आंखरी बेंच पे
उकेरा हुआ
...कोई नाम,
चमक खोता
जर्किन जड़ा टाई पिन,
...टूटा हुआ
मैंचिंग कफ बटन,
प्रेस से जली
..चैक वाली
हाफ शर्ट,
नाम के अक्षर वाला
..की रिंग,
..खाली परफ्यूम की
दिलकश शीशी,
सलवटों मैं गुम
..फिरोजी सा रुमाल,
यूं ही तो कहीं
मिल जाती हैं
...यादें....!
तुम बताओ तो
..तुम्हें याद हैं..
तुम्हीं ने कहा था
""यादों की कोई..
........शक्ल नहीं होती !!