Thursday, July 6, 2017

छोड़ ये बहाना

अब छोड़ ये बहाना जिंदगी
कभी घर भी आना जिंदगी

तू मिलेगी कभी तो पूछेंगे
हैं कहाँ तेरा ठिकाना जिंदगी
गर मिले तो मौत अच्छी हैं
हैं हादसों का फ़साना जिंदगी

तेरी भी उम्र बहुत बीत चुकी
तुझे क्या समझाना जिंदगी
  
सोचता हूँ तो याद आता हैं
वो तेरा मुस्कुराना जिंदगी