Thursday, July 6, 2017

किसी सूरत से तू जुदा न लगे

किसी बायस किसी सूरत से तू जुदा लगे !
तू कभी दूर भी जाये तो फांसला न लगे !!

मैं नफरतों के अजब, दौर  से गुजरा हूँ !
जहाँ कोई मुझे मेरे सिवा खुदा न लगे !!
  
ये कैसा इश्क हैं तेरा कैसी तरफदारी हैं !
के तू मेरा हो कर भी कभी मेरा न लगे
!

ये बद्दुआ हैं तुझे गर किसी को चाहे तू !

खुदा करे की तुझे कोई मेरे सिवा न लगे !!

मेरी गली से गुजरता हैं वो कभी यूं भी !

के मुझसे हो भी तो कोई भी
वास्ता न लगे !!

तेरी गजल में मुकम्मल करूं तो कैसे करू !

जो में रदीफ़ को पकडू तो काफिया न लगे !!