Monday, June 27, 2016

..""घूंघट""

...वो रात
नई "नवेली", सकुचाई सी
मधुमय "चाँद"
...उतावला सा
खिड़कियों के पार कहीं ..!
..चूड़ियों की
भरपूर "छनक" में ,,
स्वप्नीली आँखों की लरज में
..सांसों के आवर्तन में ,,
"रात रानी" सी
"महकती" रही
...वो रात..!!
..""घूंघट""
..न जाने कब
"सरक" गया था
..."होले" से..!!!
...हरीश.....