Tuesday, September 22, 2015

उनकी आँखों में चरागों से ख़्वाब जलते हैं

एक  ख़याल बस यूं ही ……… 

उनकी आँखों में चरागों से ख़्वाब जलते हैं -२ 
जाने कितनों के मोहब्बत में दिल मचलते हैं !!

यूं न हसरत से,, भरे चाँद को देखा करिये-२  
लोग कहने लगें,, दो चाँद भी निकलते हैं !!

देखने वालों ने,, तुममे  ख़ुदा  देखा होगा -२ 
राह चलते हुए,, सज़दे में लोग मिलते हैं !!

तुम न मानो मुझे अपना तो कोई बात नहीं-२  
​हम वो आशिक़ हैं जो साये से साथ चलते हैं !!

माना दुश्वार ही होगा ये मोहब्बत का चलन -२ 
ये तो अरमान हैं सम्भले से कब सँभलते हैं ​!!

तुम्हें सोचूं तुम्हें देखूं ग़ज़ल में लिख दूँ तुम्हें -२ 
ऐसी किस्मत पे तो दुश्मन भी हाथ मलते हैं !!

​-------हरीश भट्ट------