Monday, September 12, 2011

कोई तआल्लुक न वास्ता रखना

 
कोई तआल्लुक न वास्ता रखना
बस, गुजरने का रास्ता रखना !!

लब पे चाहे न आ सके फिर भी

दिल में छोटी सी, दास्तां रखना !


रोज़ एक चाँद सा मिले  छत पे

खुद को हमसे यूं, आशना रखना !


गर जमीनों से की मोहब्बत हो

दफ्न आखों में, आसमां  रखना !
 
हमसफ़र हो न हो मिले न मिले
साथ यादों का, कारवां रखना !!
 
रोज मिलने न आ सको तो भी
एक ख़त का
तो सिलसिला रखना !